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Alakh Niranjan Aadesh | Har Har Mahadev Powerful Shiv Bhajan 2026 #shivbhajan

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Lyrics

कौन पुकारे राख के भीतर,

कौन जले अंगारों में…

कौन छुपा है शून्य बनाकर,

इन सांसों के तारों में…

 

महादेव… महादेव…

महादेव… महादेव…

आदेश… आदेश…

 

श्मशानों की निस्तब्ध रातों में,

जिसका डेरा लगता है।

मृत्यु जहाँ पर अंत समझे,

वो जीवन वहाँ जगता है।

 

ना मैं शब्द, ना मैं वाणी,

ना कोई उच्चार हूँ।

महादेव की मौन कृपा का,

धरती पर विस्तार हूँ॥

 

अलख निरंजन… अलख निरंजन…

नयन बंद, जग जागे।

आदेश… आदेश…

ना मैं जन्म, ना मैं मृत्यु,

ना कोई अभिमान हूँ।

महादेव… महादेव…

महादेव… महादेव…

आदेश… आदेश…

 

मैंने देखा चाँद उतरकर,

जटाओं में सो जाता है।

गंगा बनकर प्रेम स्वयं ही,

शिव चरणों को पाता है।

 

महादेव… महादेव…

महादेव… महादेव…

 

ना मैं देह, ना मैं छाया,

ना कोई आकार हूँ।

राख उड़ा दे नाम का झोंका,

बस शिव का इक दावा हूँ।

 

अलख निरंजन… अलख निरंजन…

राख बिछाकर धरती ऊपर,

अपना आसन डाला है।

आदेश… आदेश…

शिव कथा अनसुनी॥

 

जहाँ समय भी थक कर बैठा,

वहाँ अघोरी चलता है।

जिसको जग अंधकार कहे,

वो उसमें सूरज मलता है।

 

महादेव… महादेव…

कालों के भी काल।

महादेव… महादेव…

तेरा कौन मिसाल॥

 

(उच्च स्वर में उत्कर्ष)

 

ना धन माँगूँ, ना वैभव माँगूँ,

ना जग का सम्मान।

बस इतना कर दे औघड़ बाबा,

तेरा हो जाऊँ पहचान।

 

अलख निरंजन… अलख निरंजन…

गूँजे दसों दिशाएँ।

आदेश… आदेश…

शिव स्वयं सुन जाएँ॥

 

(अंतिम समापन — मंत्र जैसा)

 

राख हूँ मैं…

राख में तू…

श्वास हूँ मैं…

श्वास में तू…

 

शून्य हूँ मैं…

शून्य में तू…

महादेव…

महादेव…

 

अलख निरंजन…

अलख निरंजन…

 

आदेश…

आदेश…

 

हर हर महादेव..

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नमामीशमीशान निर्वाणरूपं: रुद्राष्टकम् का संपूर्ण पाठ, अर्थ और 5 चमत्कारी लाभ

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Alakh Niranjan Aadesh

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